रैन बसर

तू मेरी रातों की नींद बन..
आँखों में समाई है..
हौले हौले फिर सपनों में..
मद्धम मद्धम साँसों से मिलना !

तेरे इसी इंतज़ार में..
दिनों से सौदे कर लिए..
मुसलसल ख्वाबों में तू आती रहे..
रातों से फिर ऐसे वादे कर लिए !

हो फिर ऐसी कशिश अपने मिलन में..
कि इक दूजे में घुल जाए..
चढ़े इश्क़ का फिर ऐसा रंग..
कायनात लगे फीकी और महफ़िल बेरंग हो जाए !

ना सपना ये टूटे मेरा..
ना तू मुझसे दूर हो..
जब कभी आँखें बंद हो मेरी..
तू बस उसमे रैन बसर हो !!

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