नारी

मुझसे ही मान और मर्यादा है.. सभ्यता और संस्कृति की गाथा है.. मैं ही बेटी और माँ हूँ.. परिवार की आन और शान हूँ.. बहू और ग्रहणी हूँ.. पर किसी का ना ऋणी हूँ !! युगों युगों से धरती पर.. अम्बे और दुर्गा का रूप हूँ.. प्रेम की मूरत में.. मैं ही राधा स्वरूप हूँ... Continue Reading →

उलझन

उलझा उलझा सा रहता हूँ..ऐ ज़िंदगी तेरे धागों का सिरा नहीं मिलता.. रिश्तों को रख के देखा इसकी साख पर, नापा तो फिर हिसाब नहीं मिलता !! टुकड़े टुकड़े जमा किए.. बूना तो अरमानो का लिबाज़ निकला.. हाथ डाल टटोली जब जेब इसकी, कई रातों का खोखला सपना निकला !! चलते चलते फिर मिला था..ऐ... Continue Reading →

सेहमी सी रातें

सेहमी सी पर्दे की पीछे खड़ी परछाई जैसी.. अनकही अनसुनी ज़ुबाँ हो तुम.. दबे पाओं गुजरती हो कभी.. कभी चाँद संग ले आती हो तुम.. सर्द हवा..बदन को छू जाती है ऐसे.. तड़पते राहगीर के लिए जैसे छाँव हो तुम.. मदहोश हैं तेरे अफ़सानो में ऐसे.. जानके भी अनजान ऐसी कहानी हो तुम.. ये काली... Continue Reading →

कृष्ण कन्हैया

श्याम रंग देख उसका, मन हिल्लोरे खाता जाये, मनभावन मुरलिया जब वो नटखट, यमुना तीर बजाये !! अठखेलियाँ करता रास रचाता, गोपियों संग धूम मचाता, कर चोरी माखन की, माँ यशोदा को ख़ूब नचाता !! राधा संग नैन लड़ाये, मीरा का प्रिय कहलाये, आयी जब जब होली ब्रिज में, सब पर प्रेम रस बरसाए !!... Continue Reading →

शमा

जिसके इंतज़ार में.. शमा जलाये बैठा करती थी.. झरोखे का गला घोटे.. कि रोशनदान भी अब अंधेरों से वाकिफ होने लगे थे.. वक़्त था कि बर्फ सा सख्त.. याद बनकर मोम के साथ पिघलने लगा था.. रौशनी घटती और इंतज़ार बढ़ता.. सिलसिला यही रोजाना चलता.. और फिर दस्तूर सा बन गया ! उम्मीद में दिन... Continue Reading →

मेरे वतन

तू सिर्फ़ देश नहीं,आन है.. तुझसे ही मान और सम्मान है.. तू धरती और आसमान है.. हर साँस तुझ पर क़ुर्बान है ! वीरों के बलिदानों की गाथा.. जब दूर उत्तर में हिमालय है गाता.. दक्षिण में हिंद महासागर लहराता.. पूर्व से बहती जो हवा तेरे आँचल सी.. पश्चिम में फिर सागर लिपट सा जाता... Continue Reading →

रैन बसर

तू मेरी रातों की नींद बन.. आँखों में समाई है.. हौले हौले फिर सपनों में.. मद्धम मद्धम साँसों से मिलना ! तेरे इसी इंतज़ार में.. दिनों से सौदे कर लिए.. मुसलसल ख्वाबों में तू आती रहे.. रातों से फिर ऐसे वादे कर लिए ! हो फिर ऐसी कशिश अपने मिलन में.. कि इक दूजे में... Continue Reading →

शाख पर पड़े किस्से

इठलाती हुई छत पर आना.. गीली दास्तानों को शाख पर सूखा जाना.. कुछ किस्से मेरे नाम के मिल जाये अगर.. आँचल डाल कड़ी धूप से बचा जाना !!   मेरी यादों के पहरों पर अब साये भी नहीं.. लम्हे जो बिताये वो कमाए भी नहीं.. तेरी इन्हीं डालो पर लटक रहे जो किस्से.. मैंने अभी... Continue Reading →

गर तुम होती

ये रात वो होती..तो तुम मेरे साथ होती.. शमा फिर रोशन..तेरी महफ़िल से होती !! कुछ तुम कहती..कुछ मेरी सुनती.. बनके फिर दास्ताँ..मेरे लबों पर होती !! छलकती जाम सी..तो शायर की नज़्म होती.. मशहूर फिर तेरी जवानी..मेरे मुशायरों से होती !! कसीदे पढ़ता तेरे नाम के..आयतों में भी होती.. बनके फूल गुलाब का..किताबों के... Continue Reading →

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