गर तुम होती

ये रात वो होती..तो तुम मेरे साथ होती.. शमा फिर रोशन..तेरी महफ़िल से होती !! कुछ तुम कहती..कुछ मेरी सुनती.. बनके फिर दास्ताँ..मेरे लबों पर होती !! छलकती जाम सी..तो शायर की नज़्म होती.. मशहूर फिर तेरी जवानी..मेरे मुशायरों से होती !! कसीदे पढ़ता तेरे नाम के..आयतों में भी होती.. बनके फूल गुलाब का..किताबों के... Continue Reading →

तेरा एहसास

तू मुजासिम एक कफूर,मैं धुआँ धुआँ सा.. पर्वतों से टकराता हुआ.. तू दरख़्त ए सख्त,मैं शाख शाख कमजोर सा.. आँधियों में बिखरता हुआ.. तू वक़्त सदी का,मैं लम्हा लम्हा एक पल सा.. पलक झपकते गुजरता हुआ.. तू सैलाब जज़्बातो का,मैं बूँद बूँद एहसास का.. अश्कों सा टपकता हुआ.. तू ही तू हर जगह.. है तेरा... Continue Reading →

गाँव बहुत याद आता है

आँगन में रखी चारपाई बगल में मिट्टी की सुराही.. गर्मियों में जोड़ा इन से नाता है माँ ,तेरा गाँव बहुत याद आता है..! चबूतरे पर सुनहरी शाम की दस्तक दोस्तों की ठिठोली में यूँ गुजर जाती थी.. वही किस्से जब अब चाँद सुनाता है माँ ,तेरा गाँव बहुत याद आता है..! गल्ली के नुक्कड़ पर... Continue Reading →

माटी का मोल

माना की अनमोल नहीं,तेरी ज़िन्दगी के बाज़ारों में.. खड़े खड़े बिक जाऊं,जुबाँ से.. क्या इतनी ही कीमत हज़ारो में..! माटी का मोल लगाते हो,उड़ता हूँ जो मैं पैरों से.. अपनों ने ही नीलाम कर दिया.. उम्मीद करूँ क्या फिर गैरों से..! तुझे मुझमे ही तो मिलना है,फिर मोल भाव करते क्यूँ.. ज़िंदा रहते कीमत दे ना... Continue Reading →

शहर

कुछ लिखा है तेरे शहर से.. आबो हवा में साँस जो लेता हूँ.. राज़ ये हक़ीक़त के दफनाए है.. तसव्वुर में,मैं खोज लेता हूँ !! दिन अरमानों की आहुति है.. और शब् ज़ख्मो पर मरहम.. ख़्वाबों को खुली आँखों पर रखके.. शब्-इ-हिज्राँ में सो लेता हूँ !! ख़ामोशी बिकते देखी है,खुल्लेआम तेरे बाज़ारो में.. अकेला... Continue Reading →

ज़िहाद

वादियों में आज फिर वो मंजर था.. परिंदे भी सहमे से उड़े.. फिज़ाओ में फैली गंध लहू की.. कि कुदरत टुकड़ो में बिखरी थी.. किसी काफिर ने फिर गोलिया दाग़ी थी.. खुद को बाघी और.. सियासी भेड़ियो के सबब से.. रूहें थर्रा के काँपी थी.. यूँही मुल्क के बटवारों से.. इंसानियत के सब्र फिर हैं... Continue Reading →

राह की दास्ताँ

राह की दास्ताँ की कोई दिशा नहीं कोई मुल्क तो कोई निशां नहीं ले चले सबको मंजिल की ओऱ खुद के ठिकाने का मंजर नहीं !! न कोई भेद,न उम्र का तकाजा राहगीरों की कहानी उसकी ज़ुबानी है रहती है मस्ती में मलंग गिला ना शिकवा,वो अपनी ही दीवानी है !! गुमनाम से काले अंधेरों... Continue Reading →

ख़्वाइश

बात महज़ एक रात की थी.. उम्र दराज़ तो न मांग ली थी.. चाँद की गवाही देकर.. रात ने अपनी ख़ामोशी तो न मांग ली थी ! वो कहते है.. कफ़ालत-ए-झूठ मुमकिन नहीं.. पूछे उनसे कोई दुनिया पर क्या ऐतबार है सही ? बे मक़सद फिरती है ये रूहें,ज़िक्र इनका करना किफ़ायत तो नहीं !... Continue Reading →

उम्मीद

धुँधली सी नज़रें किसे ढूँढती है.. जिंदगी से परे उम्मीद तो नहीं..? आँखों में गुज़ारदी रातें जिसने.. सवेरे को फिर तरसती क्यूँ ? निवाला अपने मुँह का खिलाया.. भूक से कहीं तड़पती तो नहीं..? खुदगर्ज बन जिसे छोड़ गया तू.. छत की उम्मीद फिर रखती क्यूँ ? तेरी एक हिचकी से जिसके कदम मुड़ जाते... Continue Reading →

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