राह की दास्ताँ

राह की दास्ताँ की कोई दिशा नहीं कोई मुल्क तो कोई निशां नहीं ले चले सबको मंजिल की ओऱ खुद के ठिकाने का मंजर नहीं !! न कोई भेद,न उम्र का तकाजा राहगीरों की कहानी उसकी ज़ुबानी है रहती है मस्ती में मलंग गिला ना शिकवा,वो अपनी ही दीवानी है !! गुमनाम से काले अंधेरों... Continue Reading →

Two Feather’s Sheet

Curled and crumbled I was, Struggling between the two feather's sheet, In the horrible situation with the most uncomfortable position.. Through the sleek slits.. Scorching the monster breeze.. Amongst the snoring wolves.. Siting alone and squeezed.. The tinges of the darkest night.. Passed from my open eye.. Each moment I was so drenched.. As if... Continue Reading →

ख़्वाइश

बात महज़ एक रात की थी.. उम्र दराज़ तो न मांग ली थी.. चाँद की गवाही देकर.. रात ने अपनी ख़ामोशी तो न मांग ली थी ! वो कहते है.. कफ़ालत-ए-झूठ मुमकिन नहीं.. पूछे उनसे कोई दुनिया पर क्या ऐतबार है सही ? बे मक़सद फिरती है ये रूहें,ज़िक्र इनका करना किफ़ायत तो नहीं !... Continue Reading →

उम्मीद

धुँधली सी नज़रें किसे ढूँढती है.. जिंदगी से परे उम्मीद तो नहीं..? आँखों में गुज़ारदी रातें जिसने.. सवेरे को फिर तरसती क्यूँ ? निवाला अपने मुँह का खिलाया.. भूक से कहीं तड़पती तो नहीं..? खुदगर्ज बन जिसे छोड़ गया तू.. छत की उम्मीद फिर रखती क्यूँ ? तेरी एक हिचकी से जिसके कदम मुड़ जाते... Continue Reading →

High

The smoke or was it a cloud of dream Where I was lying but yet flying. The weightless body, or the heaviest core, Blown with the air, while drowning on the shore. The echoes, was it the tick of clock ? Or the blasted victim I was. But could hear from so far, Or near as if I... Continue Reading →

किसान

गरम चूल्हे पर रोटी सेकते हाथ, आज भी काँपे जा रहे हैं । नंगे बदन पर सर्द हवा की मार, आज भी सहे जा रहे हैं ।। दीवारें जो कभी मिट्टी से लिपी जाती थी, उसी मिट्टी की खुशबू को आज.. दफ़्न किये जा रहे हैं ।। वक़्त के खेल ने भी, अजीब नज़ारा दिखाया... Continue Reading →

Life

I was dying and dumped.. Was getting dry and dread.. For once there was a life in me.. And the source was shine.. The mighty and fierce.. The fervour and fire.. Taking out my belief.. Of giving birth to me.. Though helpless i was.. Then why acting inhuman to me ? Is that Sun was... Continue Reading →

Sparrow

Each day on the window pane.. Gliding narow taking heavy strain.. All the way flying to town.. This cute bird with its feathers brown.. Moves up down and hops along.. To fetch my attention through its song.. Tries hard hitting the sill.. but frown of my face makes her ill.. Little sparrow in search of... Continue Reading →

मज़हब का रंग

फिर उठी कटार और तलवारें, इंसानियत को रख के सिरहाने ! शहर में निकल पड़े, मज़हब भेदी खून में नहाने !! आबाद हुआ करते थे जो मोहल्ले, कब्रिस्तान की शक्ल ओढ़ी है ! इबादतें खामोश है, हिंदुओ ने क़ब्रें जो खोदी है !! लाल हो चली है ये सड़कें, दीवारों ने चींखें लगाई है !... Continue Reading →

Powered by WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: